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time:2021-10-22 17:15:59 फ्रैंकलिन टेम्पलटन एमएफ से आपको अपना निवेश कब निकालना चाहिए? Views:4591

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फ्रेंकलिन टेंपलटन के इंडियन मैनेजमेंट ने घरेलू कारोबार के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई थी.
फ्रेंकलिन टेंपलटन की स्टोरी में रोज नई रोचकता आ रही है. तरलता के संकट से शुरू हुआ फ्रैंकलिन का मामला अब डेट फंड को बंद करने से होता हुआ विदेश नीति पर जाकर अटक गया है. इस बारे में पिछले महीने इकनॉमिक टाइम्स ने आपको जानकारी दी थी कि एसेट मैनेजर के अमेरिकी पैरंट कंपनी ने इस मामले में भारतीय प्रशासन से संपर्क कर समाधान निकालने के लिए डिप्लोमेटिक चैनल ढूंढना शुरू किया है.

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एसेट मैनेजर ने वास्तव में यह भी संकेत दिया था कि अगर नियामक इसके ऊपर कार्रवाई करता है तो यह उस से कैसे पीछा छुड़ा सकता है. इसके कुछ दिन बाद ही फ्रेंकलिन टेंपलटन के इंडियन मैनेजमेंट ने घरेलू कारोबार के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई थी. उसके बाद भी फंड हाउस द्वारा कई स्कीम को वापस लेने की वजह से फ्रेंकलिन के निवेशक निराश हो चुके हैं.

एक नए डेवलपमेंट में अब फ्रेंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड के उन निवेशकों के लिए भी संकट आ सकता है जो उसके द्वारा बंद किए गए 6 फंड से अलग निवेश कर चुके हैं. भारत में म्यूचुअल फंड कारोबार में बहुत पुरानी खिलाड़ियों में से एक फ्रेंकलिन टेंपलटन ने भारत में दुनिया के बेस्ट वेल्थ मैनेजमेंट प्रैक्टिस की शुरुआत की थी.

वास्तव में राजकोषीय प्रावधानों और जिम्मेदारियों के हिसाब से फ्रेंकलिन टेंपलटन के प्रावधान को गोल्ड स्टैंडर्ड का माना जाता था. डेट स्कीम को हैंडल करने में फ्रेंकलिन टेंपलटन की गलतियों ने बहुत से निवेशकों का भरोसा छीन लिया है.

फ्रेंकलिन टेंपलटन की म्यूचुअल फंड स्कीम में अब तक ₹78,000 करोड़ का निवेश किया जा चुका है, लेकिन बहुत से लोग अपना निवेश भुनाना चाहते हैं. सवाल यह है कि क्या आपको फ्रेंकलिन टेंपलटन फंड में किए गए निवेश में बने रहना चाहिए या इसे भुना लेना चाहिए?

अगर आप इस बात से परेशान हैं कि आपका पैसा फ्रेंकलिन के पास पड़ा हुआ है तो आपको इस निवेश से घबराने की जरूरत नहीं है. आपका पैसा सुरक्षित है और यह एक ट्रस्ट में रखा हुआ है जो आपके नाम से बना हुआ है. एएमसी सिर्फ फीस लेकर आपके पैसे का प्रबंधन कर रही है. अगर कोई फंड हाउस अपना कारोबार समेट लेता है और बंद हो जाता है तो निवेशकों को मौजूदा एनएवी पर फंड हाउस से निकलने का मौका मिलता है.

अगर निवेशक जबरन अपना पैसा किसी म्यूचल फंड से निकालते हैं तो इसमें भी जोखिम होता है. सबसे पहली बात तो यह कि आपको कैपिटल गैन पर टैक्स देना पड़ता है. इसके साथ ही आपकी टैक्स देनदारी इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपने किसी स्कीम में किस तरह से निवेश किया हुआ है. इसके साथ ही दोबारा इन्वेस्टमेंट के जोखिम की वजह से भी किसी म्यूच्यूअल फंड से निकलना समझदारी वाला काम नहीं है.

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